Kolkata में TMC दफ्तर पर बुलडोजर, संदेशखाली में फायरिंग से हड़कंप
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से हिंसा की खबरें आ रही हैं। उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली (बामनघेरी) में बुधवार रात गश्त कर रहे सुरक्षाबलों पर उपद्रवियों ने अचानक हमला बोल दिया। इस हिंसक झड़प में नाजाट थाने के प्रभारी (OC) सहित पांच सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में केंद्रीय सुरक्षा बल के दो जवान और एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया है।
कोलकाता में बुलडोजर एक्शन और राजनीतिक घमासान
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कोलकाता के प्रतिष्ठित 'न्यू मार्केट' इलाके में भारी तनाव देखा गया, जहां भीड़ ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक पार्टी कार्यालय को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। इस दौरान आसपास की दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई, जिससे व्यापारियों में दहशत का माहौल है। इस घटना का वीडियो साझा करते हुए टीएमसी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला और इसे 'विनाशकारी परिवर्तन' करार दिया है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
पांच राज्यों के चुनावी परिणाम और सत्ता का फेरबदल
4 मई को आए पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने देश की राजनीतिक दिशा में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। असम और पुडुचेरी में जहाँ एनडीए (NDA) अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रही, वहीं पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में भारी सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव हार गईं, जिसे उनकी पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने दस साल बाद शानदार वापसी करते हुए वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया है।
तमिलनाडु में 'विजय' का उदय और द्रविड़ राजनीति का अंत
तमिलनाडु के चुनावी नतीजों ने इस बार पूरे देश को हैरान कर दिया, जहां अभिनेता विजय की दो साल पुरानी पार्टी 'तमिलगा वेट्टरी कड़गम' (TVK) सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। राज्य के 59 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब डीएमके (DMK) या एआईएडीएमके (AIADMK) के बिना कोई तीसरी शक्ति सरकार बनाने जा रही है। इस चुनाव में निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भी अपनी सीट गंवानी पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु के मतदाताओं ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर एक नए विकल्प को चुना है, जिसने राज्य की दशकों पुरानी राजनीतिक विरासत को बदल कर रख दिया है।
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